फिल्म केवल दाऊद इब्राहिम या छोटा राजन के बारे में नहीं है; यह उस के बारे में है जिसने उन्हें खत्म करने के लिए 'एनकाउंटर' को एक हथियार बनाया। कहानी को पुलिस अधिकारियों (जैसे प्रदीप शर्मा और रवींद्र आंग्रे) और उस दौर को कवर करने वाले पत्रकारों के नजरिए से सुनाया गया है। 2. मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
इसका मतलब है कि यह सीधे नेटफ्लिक्स के सर्वर से रिप की गई है, जिससे वीडियो और ऑडियो की क्वालिटी ओरिजिनल रहती है।
अगर आपने पहले 'ब्लैक फ्राइडे' या 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फिल्में देखी हैं, तो इसमें दी गई जानकारी आपके लिए बहुत नई नहीं होगी। निष्कर्ष
यह डॉक्यूमेंट्री 1990 के दशक के मुंबई की असल कहानी दिखाती है, जब शहर "डी-कंपनी" और दाऊद इब्राहिम के खौफ में था। यह फिल्म मुख्य रूप से पुलिस अधिकारियों के उदय और उनके द्वारा माफिया राज को खत्म करने के विवादास्पद तरीकों पर आधारित है। गहरा विश्लेषण (Deep Review) 1. विषय और कहानी (Theme & Narrative)
कुछ आलोचकों का मानना है कि फिल्म पुलिस के पक्ष को ज्यादा ग्लोरिफाई (महिमामंडन) करती है और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की गहराई में नहीं जाती।